राज्य में तेजी से बढ़ते तकनीकी उपयोग के बीच इलेक्ट्रानिक कचरे (ई-वेस्ट) की समस्या गंभीर होती जा रही है। मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण हर साल बड़ी मात्रा में ई-वेस्ट उत्पन्न हो रहा है, जिसके सुरक्षित निस्तारण की चुनौती सरकार के सामने खड़ी है। इसी को देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी विकास प्राधिकरण (आइटीडीए) अब ई-वेस्ट प्रबंधन के लिए नई और व्यापक नीति तैयार कर रहा है।
प्रदेश में बढ़ रहे ई-वेस्ट को देखते हुए अब इसे वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर इसके पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना जरूरी हो गया है। इसके तहत कचरे के संग्रहण और बिक्री के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। साथ ही अनधिकृत कबाड़ी नेटवर्क पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी, ताकि खतरनाक पदार्थों का गलत तरीके से निस्तारण रोका जा सके।
दरअसल, ई-वेस्ट में यदि कंप्यूटर या लैपटाप की बात करें तो इनमें काफी सरकारी जानकारियां डाटा के रूप में एकत्र रहती है। इनके खराब होने पर भी इनकी हार्ड डिस्क में ये जानकारी बनी रहती है। इसका कहीं गलत इस्तेमाल न हो, इसे लेकर भी नीति में स्पष्ट प्रविधान किए जाएंगे। इसकी बिक्री से होने वाली आय को राजकोष में जमा किया जाएगा।
इसके साथ ही ई-वेस्ट के सुरक्षित निपटान के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे, ताकि लोग पुराने इलेक्ट्रानिक उपकरणों को खुले में फेंकने के बजाय निर्धारित केंद्रों पर जमा करें। स्कूलों, कालेजों और शहरी निकायों के माध्यम से भी जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
अधिकारियों का कहना है कि यह नीति राज्य में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे न केवल प्रदूषण पर नियंत्रण मिलेगा, बल्कि संसाधनों के पुन: उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में उत्तराखंड को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल राज्य के रूप में स्थापित किया जा सके।
डाटा गवर्नेंस पर भी बनेगी नीति
प्रदेश में इस समय सभी कार्य आनलाइन हो रहे हैं। ऐसे में सभी सरकारी कार्यालयों में बड़ा डेटा बैंक बन रहा है। इसकी सुरक्षा करना बेहद जरूरी हो गई है। इसकी महत्ता इस बात से समझी जा सकती है कि गत वर्ष साइबर हमले के बाद कुछ विभागों का डाटा रिकवर करने में महीनों का समय लग गया था। इसे देखते हुए डाटा गवर्नेंस की नीति पर काम चल रहा है।
एआइ नीति अंतिम दौर में
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग एआइ नीति तैयार कर चुका है। इसका ड्राफ्ट पहले ही जारी हो रखा है। अब इसमें मिले कुछ परामर्शों को शामिल करते हुए इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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