




हमारा प्राथमिक लक्ष्य कौशल विकास पर बल देते हुए शिक्षार्थियों को अधिक से अधिक स्वावलंबी बनाना है। प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, माननीय कुलपति, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र (CIQA) द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत “Graduate Employability & National Skill Qualification Framework तथा भारतीय स्किलिंग इकोसिस्टम में NCVET की भूमिका एवं जिम्मेदारियां” विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन विश्वविद्यालय के जनल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए माननीय कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और कौशल आधारित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्तराखंड सरकार द्वारा कौशल विकास केंद्र की जिम्मेदारी उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय को दिया गया है। ऐसे में इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों एवं उत्तराखंड के तमाम जरूरतमंद शिक्षार्थियों को नई दिशा प्रदान करते हैं और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। इस अवसर पर NCVET, नई दिल्ली से प्रो. अशोक कुमार गाबा (Executive Member) एवं श्री अमित शर्मा (Senior Consultant) मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं स्वागत भाषण के साथ हुआ। स्वागत करते हुए कंप्यूटर एवं आईटी विद्याशाखा के निदेशक प्रो. जितेंद्र पांडे ने कहा कि आज के समय में उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक एवं कौशल आधारित दक्षताओं से भी सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्य वक्ता प्रो. अशोक कुमार गाबा ने अपने व्याख्यान में कहा कि वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल आधारित शिक्षा ही विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान कर सकती है। उन्होंने बताया कि National Skill Qualification Framework (NSQF) के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण को एक संरचित और मानकीकृत रूप दिया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों की दक्षता का सही मूल्यांकन संभव हो सके। उन्होंने आगे कहा कि NCVET का उद्देश्य देश में कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए गुणवत्ता मानकों को स्थापित करना तथा प्रशिक्षण की विश्वसनीयता को बढ़ाना है। इससे युवाओं को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा।
प्रो. गाबा ने कहा कि नई शिक्षा नीति के आने के बाद स्नातक के बाद नौकरी की संभावनाएं लगभग सत्तर फीसदी बढ़ी है। दूसरे वक्ता श्री अमित शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय स्किलिंग इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और इसमें विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति कौशल विकास को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि पाठ्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप पुनर्संरचित किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकें।
इस अवसर पर प्रो. गगन सिंह (सहायक निदेशक, CIQA) ने विश्वविद्यालय की गुणवत्ता उन्नयन संबंधी पहलों पर प्रकाश डाला। प्रो. आशुतोष कुमार भट्ट (सदस्य, CIQA) ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक दक्षताओं के विकास हेतु प्रेरित किया और कार्यक्रम का सफल संचालन किया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन CIQA के निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने किया। इस अवसर पर मैनेजमेंट स्टडी की निदेशक प्रो. मंजरी अग्रवाल, जनसंचार के निदेशक प्रो. राकेश चंद्र रयाल समेत विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
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