घपरोळ’ — बिना बात का हल्ला-गुल्ला,- डॉ. राकेश चन्द्र रयाल (मनरागी)

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गढ़वाली बोली के शब्दों की एक खासियत है कि वे केवल किसी भाव या व्यवहार का नाम नहीं बताते, बल्कि कई बार उस पूरे भाव की व्याख्या भी अपने भीतर समेटे होते हैं। ऐसा ही एक बड़ा रोचक शब्द है— ‘घपरोळ’।
‘घपरोळ’ को ‘घप’ + ‘रौल’ से बना हुआ समझा जा सकता है। गढ़वाली बोलचाल में ‘घप’ का भाव है—कहीं पर अचानक से, बिना संदर्भ या बिना जरूरत के बीच में आ जाना। वहीं ‘रौल’ का अर्थ शोर, हल्ला-गुल्ला, कोलाहल या किसी बात को जरूरत से ज्यादा उछालना है। इन दोनों भावों को जोड़ दें तो ‘घपरोळ’ का अर्थ अपने आप स्पष्ट हो जाता है—बिना बात के बीच में पड़कर हल्ला-गुल्ला करना, बात को अनावश्यक रूप से बढ़ाना या जबरदस्ती माहौल गरम कर देना।
हमारे आसपास ऐसे ‘घपरोळ’ करने वाले लोग अक्सर मिल जाते हैं। जहाँ दो लोग शांतिपूर्वक किसी विषय पर बात कर रहे हों, वहाँ अचानक कोई तीसरा व्यक्ति ‘घप’ से आ टपकता है और फिर अपनी बात, अपनी राय और अपनी आवाज से ऐसा ‘रौल’ मचाता है कि मूल विषय ही पीछे छूट जाता है। उसे न पूरी बात पता होती है, न प्रसंग का संदर्भ, लेकिन बोलने और माहौल बनाने में वह सबसे आगे रहता है।
‘घपरोळ’ केवल शोर मचाने तक सीमित नहीं है। यह उस मानसिकता का भी परिचायक है, जिसमें व्यक्ति हर बात में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है, चाहे उसकी जरूरत हो या न हो। छोटी-सी बात को बड़ा बनाना, साधारण चर्चा को बहस में बदल देना और फिर उस बहस को हल्ले में बदल देना—यही तो असली ‘घपरोळ’ है।
आज के समय में इसका एक आधुनिक रूप सोशल मीडिया पर भी खूब दिखाई देता है। किसी विषय की पूरी जानकारी हुए बिना टिप्पणी करना, आधी-अधूरी बात को पकड़कर बहस शुरू कर देना और फिर देखते ही देखते कमेंटों में ऐसा ‘रौल’ मचाना कि असली मुद्दा ही गायब हो जाए—इसे भी अपने ढंग का डिजिटल घपरोळ कहा जा सकता है।
गढ़वाली के ऐसे शब्दों की खूबसूरती यही है कि वे कम शब्दों में व्यक्ति के व्यवहार का पूरा चित्र खींच देते हैं। ‘घप’ बताता है कि कहाँ और कैसे प्रवेश हुआ, और ‘रौल’ बता देता है कि प्रवेश के बाद क्या हुआ। दोनों मिलकर बना ‘घपरोळ’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक पूरे व्यवहार का सटीक चित्रण है।
कभी-कभी जीवन में सबसे समझदार व्यक्ति वही होता है, जो हर जगह ‘घप’ होने और हर बात में ‘रौल’ करने के बजाय यह समझता है कि कहाँ बोलना है, कितना बोलना है और कहाँ चुप रह जाना ही बेहतर है।

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