उत्तराखंड में विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों में आउटसोर्स के जरिए काम कर रहे हजारों UPNL (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर आई है। राज्य सरकार ने उपनल कर्मियों को उनके पद के हिसाब से न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ता (DA) देने को लेकर बड़ा कदम उठाया है।
शासन ने पहले जारी किए गए शासनादेश में थोड़ा बदलाव करते हुए एक नया संशोधित आदेश जारी कर दिया है। सैनिक कल्याण अनुभाग की ओर से जारी इस नए आदेश में कर्मचारियों की जॉइनिंग डेट यानी काम पर लगने की तारीख के आधार पर वेतन और भत्ते देने का प्लान तैयार किया गया है। पूरी व्यवस्था को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटकर लागू किया जाएगा।
12 नवंबर 2018 तक लगे कर्मचारियों को तुरंत मिलेगा फायदा
सरकार की ओर से साफ किया गया है कि जो उपनल कर्मचारी 1 जनवरी 2016 से पहले से काम कर रहे हैं, और जो 1 जनवरी 2016 से लेकर 12 नवंबर 2018 के बीच भर्ती हुए हैं, उन्हें पद के मुताबिक न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ता देने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। सरकार
आपको बता दें कि यह फैसला नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा 12 नवंबर 2018 को जनहित याचिका संख्या 116/2018 में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के तहत लिया गया है। इस आदेश के लागू होने से सालों से सेवा दे रहे वरिष्ठ और पुराने कर्मचारियों को तुरंत आर्थिक फायदा मिलने जा रहा है।
13 नवंबर 2018 के बाद भर्ती कर्मियों के लिए क्या है नियम?
संशोधित शासनादेश के नियम 2(1) के मुताबिक, 13 नवंबर 2018 से लेकर 15 अक्टूबर 2024 के बीच नियुक्त हुए उपनल कर्मचारियों के लिए भी कट-ऑफ डेट तय कर दी गई है। इस दौरान लगे कर्मियों को न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ता देने की शुरुआत 1 अप्रैल 2027 से की जाएगी। हालांकि उन्हें थोड़ा इंतजार करना होगा, लेकिन भविष्य के लिए उनके हक पर भी मुहर लग गई है।
आला अधिकारियों की बैठक के बाद बनी सहमति
सैनिक कल्याण विभाग के सचिव युगल किशोर पन्त की ओर से जारी इस आदेश में बताया गया है कि 14 सितंबर 2026 को जारी मूल शासनादेश के पैराग्राफ 2(1) को काफी सोच-विचार और समीक्षा के बाद बदला गया है। 14 सितंबर के आदेश की बाकी सभी शर्तें और नियम पहले की तरह ही बने रहेंगे। इस संशोधित आदेश को वित्त विभाग की मंजूरी मिलने के बाद ई-ऑफिस सिस्टम के जरिए आधिकारिक रूप से जारी किया गया है।
कर्मचारियों में खुशी और स्थिति हुई साफ
उत्तराखंड शासन के इस फैसले के बाद राज्य भर के विभागों में तैनात हजारों उपनल कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चला आ रहा असमंजस खत्म हो गया है। जहां एक तरफ पुराने कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बढ़ा हुआ वेतन मिलने जा रहा है, वहीं बाद में जुड़े कर्मचारियों के लिए भी सरकार ने तारीख पक्की करके उनका भविष्य सुरक्षित कर दिया है।
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