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पौड़ी में गुलदार का जानलेवा हमला! घास काट रही 55 वर्षीय लीला देवी 10 मिनट तक लड़ती रहीं, दरांती से बचाई जान

पौड़ी गढ़वाल- उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में गुलदार की दहशत लगातार बढ़ती जा रही है। पौड़ी गढ़वाल के एकेश्वर ब्लॉक स्थित ईडा मल्ला, श्रीकोटखाल में शुक्रवार सुबह घास काट रही 55 वर्षीय लीला देवी पर गुलदार ने अचानक हमला कर दिया। घर से महज 300 मीटर दूर खेत के किनारे घास काटते समय झाड़ियों में छिपे गुलदार ने उन पर झपट्टा मार दिया। हमले में महिला के गाल, जबड़े और पीठ पर चोटें आईं। हालांकि, लीला देवी ने हिम्मत नहीं हारी और हाथ में पकड़ी दरांती से गुलदार का मुकाबला करती रहीं। करीब 10 मिनट तक संघर्ष करने के बाद वह उसके चंगुल से निकलने में कामयाब रहीं। घायल महिला को 108 एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।

घर से 300 मीटर दूर घास काट रही थीं लीला देवी
जानकारी के अनुसार, लीला देवी शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे नाश्ता करने के बाद घास काटने के लिए घर से निकली थीं। पहाड़ों में इन दिनों सर्दियों के लिए पशुओं का चारा जुटाने का काम तेजी से चल रहा है। इसी सिलसिले में वह घर से करीब 300 मीटर दूर खेत के किनारे घास काट रही थीं।

क्षेत्र में गुलदार की सक्रियता को देखते हुए उन्होंने जंगल के भीतर जाने के बजाय घर के पास ही घास काटने की जगह चुनी थी। लेकिन झाड़ियों और ऊंची घास में छिपे गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया।

अचानक झपटा गुलदार, गाल और जबड़े पर आई चोटें
घास काटते समय गुलदार अचानक झाड़ियों की आड़ से निकला और लीला देवी पर झपट पड़ा। हमले में उनके गाल, जबड़े और पीठ पर चोटें आईं। अचानक हुए इस हमले से महिला को संभलने का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए अपने बचाव की कोशिश शुरू कर दी।

हाथ में पकड़ी दरांती से किया मुकाबला
गुलदार के हमले के दौरान लीला देवी के हाथ में दरांती थी। उन्होंने उसी दरांती से अपना बचाव किया और लगातार शोर मचाकर मदद के लिए पुकारती रहीं। करीब 10 मिनट तक चले संघर्ष के बाद आखिरकार वह गुलदार के चंगुल से छूटने में सफल रहीं।

उनकी चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे। इसके बाद घायल महिला को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई।

108 एंबुलेंस से हंस अस्पताल पहुंचाया
घटना के बाद ग्रामीणों ने लीला देवी को 108 एंबुलेंस की मदद से हंस अस्पताल पहुंचाया। उनके गाल, जबड़े और पीठ पर आई चोटों का उपचार किया जा रहा है। इस दौरान कांग्रेस के एआईसीसी सदस्य एवं चौबट्टाखाल से पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी राजपाल बिष्ट समेत कई ग्रामीण अस्पताल में मौजूद रहे।

अक्टूबर में वन्यजीव हमलों की कई घटनाएं
उत्तराखंड में अक्टूबर महीने के दौरान वन्यजीवों के हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। 9 अक्टूबर को पौड़ी गढ़वाल के खंडाह गांव के पास घास काट रही 51 वर्षीय महिला की गुलदार के हमले में मौत हो गई थी। घटना के बाद ग्रामीणों ने पौड़ी-श्रीनगर हाईवे पर जाम लगाकर विरोध जताया था।

13 अक्टूबर को चमोली के ज्योतिर्मठ में भालू ने एक ही परिवार के पांच लोगों पर हमला कर दिया था, जिसमें चार लोग घायल हुए। वहीं, 14 से 15 अक्टूबर के बीच हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र में गुलदार ने दो ग्रामीणों को घायल कर दिया। 16 अक्टूबर को उत्तरकाशी के नौगांव में बकरियां चराने गए एक युवक पर भालू ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

आखिर आबादी के करीब क्यों पहुंच रहे गुलदार?
पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते वन्यजीव हमलों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। जंगलों के आसपास बसे गांवों में घास काटने, खेती करने और मवेशियों को चराने जाने वाले लोगों पर हमले का खतरा बना हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में भोजन की उपलब्धता, प्राकृतिक आवास में बदलाव, मवेशियों की मौजूदगी और इंसानी बस्तियों के आसपास आसानी से भोजन मिलना वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच टकराव बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

ऐसे में पौड़ी के एकेश्वर ब्लॉक में लीला देवी पर हुआ हमला एक बार फिर पहाड़ों में ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जंगल के किनारे स्थित गांवों में रहने वाले लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी सतर्क रहना पड़ रहा है।

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