उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शशांक शुक्ल को मिला ‘ऋषि सम्मान-2026’

महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह में साहित्य, आलोचना एवं हिंदी भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए किया गया सम्मानित

हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शशांक शुक्ल को साहित्य, हिंदी भाषा, आलोचना एवं शोध के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘ऋषि सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान 26 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के सोनभद्र नगर में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह एवं विचार गोष्ठी में प्रदान किया गया।
राष्ट्रीय संचेतना समिति, सोनभद्र एवं गुप्तकाशी विकास परिषद के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. शशांक शुक्ल को एक चिंतक, लेखक, विचारक एवं साहित्यिक आलोचक के रूप में उनके दीर्घकालीन अकादमिक एवं साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजा पाठक उपस्थित रहे, जबकि प्रख्यात साहित्यकार एवं चिंतक पं. पारस नाथ मिश्र मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।
डॉ. शशांक शुक्ल का हिंदी साहित्य एवं अकादमिक जगत में उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त की। लगभग 21 वर्षों के अपने शैक्षणिक एवं अकादमिक जीवन में उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वसंत महिला महाविद्यालय, केंद्रीय हिंदी संस्थान तथा हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में सेवाएं दी हैं। वे जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में विभागाध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।
साहित्यिक क्षेत्र में डॉ. शुक्ल ने आलोचना, साहित्य सिद्धांत एवं शोध के विविध आयामों पर महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनके द्वारा विकसित ‘सांस्कृतिक साहचर्यता का सिद्धांत’, ‘रचना-अंतराल का सिद्धांत’ तथा ‘साहित्यिक विकास का सिद्धांत’ जैसे नवीन साहित्यिक विचार विशेष उल्लेखनीय हैं। उन्होंने साहित्यिक पत्रिका ‘परिमिता’ के संपादन के साथ-साथ उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की न्यूजलेटर ‘उड़ान’ एवं जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय की पत्रिका ‘उत्तर वाहिनी’ के संपादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी अनेक रचनाएं एवं शोधपरक लेख देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के लिए लगभग 25 पाठ्यपुस्तकों के संपादन का कार्य भी किया है।
डॉ. शशांक शुक्ल को मिले इस सम्मान से उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के अकादमिक एवं साहित्यिक जगत की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है। उनका सम्मान हिंदी भाषा, साहित्य, शोध एवं आलोचना के क्षेत्र में उनके सतत योगदान का महत्वपूर्ण सम्मान है।

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