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*कम्युनिकेशन टुडे और भारती विद्यापीठ की 241वीं राष्ट्रीय वेबिनार में स्वास्थ्य संचार पर विमर्श*
जयपुर। स्वास्थ्य सेवाओं में रोगियों और परिजनों से संवेदनशील संवाद जनविश्वास का महत्वपूर्ण आधार है। यह विचार महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, जयपुर के निदेशक, मार्केटिंग एवं जनसंपर्क तथा पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया के जयपुर चैप्टर के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र पारीक ने व्यक्त किए।
वे द्विभाषी शोध पत्रिका ‘कम्युनिकेशन टुडे’ तथा भारती विद्यापीठ इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन्स एंड मैनेजमेंट, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 241वीं राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। विषय था ‘रोगियों की देखभाल से जनविश्वास तक: स्वास्थ्य संचार की शक्ति’।
विषय प्रवर्तन करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष एवं कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ संवेदनशील व्यवहार और स्पष्ट संवाद आवश्यक हैं। रोगी की बात ध्यानपूर्वक सुनना तथा उसकी चिंता और अनिश्चितता समझना उपचार प्रक्रिया को मानवीय बनाता है।
उन्होंने कहा कि बीमारी, उपचार के विकल्पों, संभावित जोखिम और खर्च की जानकारी सरल भाषा में देना आवश्यक है। अस्पताल की प्रतिष्ठा रोगियों के अनुभवों, सेवा की गुणवत्ता तथा शिकायतों के प्रति संस्थान की संवेदनशीलता से बनती है। उन्होंने स्वास्थ्य पत्रकारिता में किसी शोध के प्रामाणिक स्रोत, नमूनों की संख्या, अध्ययन की परिस्थितियों और निष्कर्षों की सीमाओं को स्पष्ट करने की जरूरत बताई।
मुख्य वक्ता श्री वीरेन्द्र पारीक ने कहा कि तकनीकी जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करना स्वास्थ्य संचार की प्रमुख जिम्मेदारी है। प्रशिक्षित संचारक चिकित्सक और रोगी के बीच सेतु बनकर उपचार संबंधी निर्देश समझाने में सहायता कर सकता है। स्वास्थ्य शिविरों, लेखों, विशेषज्ञों के साक्षात्कार और सामुदायिक संपर्क से जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।
उन्होंने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी पहुंचाने पर बल दिया। नई तकनीकों के प्रति आशंकाएं दूर करने के लिए विशेषज्ञों से संवाद और उपचार प्राप्त कर चुके लोगों के अनुभव उपयोगी बताए।
उन्होंने निःसंतानता संबंधी भ्रांतियां दूर करने तथा नई चिकित्सा पद्धतियों के प्रति विश्वास विकसित करने में संचार की भूमिका बताई। अंगदान में वैज्ञानिक जानकारी के साथ परिजनों की भावनाओं और निर्णय का सम्मान जरूरी बताया।
उन्होंने कहा कि कोविडकाल में समय पर विश्वसनीय सूचना पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जानकारी की पहुंच बढ़ाई है, लेकिन अपूर्ण और भ्रामक सूचनाओं से कठिनाइयां भी उत्पन्न हुई हैं।
चर्चा में मेरठ के मीडिया शिक्षाविद् डॉ. सूरज देव प्रसाद ने दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की सहायता के बजाय वीडियो बनाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने महंगे उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं तक आमजन की पहुंच पर प्रश्न उठाए।
प्रारंभ में संयोजक एवं भारती विद्यापीठ के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की सहायक प्रोफेसर प्रियंका सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने रोगियों की चिंताओं के समाधान पर भी जोर दिया। मुख्य वक्ता श्री वीरेन्द्र पारीक को ई-स्मृति चिह्न और ई-प्रमाणपत्र भेंट किए गए।
आयोजन की सफलता में जयंत राठी, पुष्पेंद्र सिंह, श्रीकांत सिंह (भारती विद्यापीठ) तथा डॉ. पृथ्वी सेंगर (आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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