जीने के लिए कई बार जहर पीना पड़ता है…।

जीने के लिए कई बार जहर पीना पड़ता है…

प्रो. राकेश चन्द्र रयाल (मनरागी)

*“मरने के लिए एक बार जहर पीना पड़ता है, जबकि जीने के लिए कई बार जहर पीना पड़ता है।”*

शायद यही जीवन की सबसे कड़वी, लेकिन सबसे सच्ची सच्चाई है।
मरना आसान है—एक क्षण का निर्णय, एक पल का अंत। लेकिन जीना… जीना हर दिन अपने भीतर एक युद्ध लड़ना है। हर सुबह उठकर चेहरे पर मुस्कान सजाना और भीतर के तूफान को छिपा लेना है। बहुत कुछ ऐसा सहना है, जिसे कहने के लिए शब्द नहीं होते और बहुत कुछ ऐसा कहना है, जिसे सुनने वाला कोई नहीं होता।
जीवन में जहर हमेशा प्याले में नहीं मिलता।
कभी वह किसी अपने के बदले हुए व्यवहार में मिलता है, कभी किसी की बेरुखी में, कभी अपमान के घूंट में, कभी विश्वासघात में और कभी उन लोगों की चुप्पी में, जिनसे हमने बोलने की उम्मीद की थी।
कभी-कभी अपने ही लोग ऐसी बातें कह जाते हैं, जो भीतर बहुत दूर तक उतर जाती हैं। हम जवाब दे सकते हैं, लेकिन रिश्ते बचाने के लिए चुप हो जाते हैं। हम अपना पक्ष रख सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज या परिस्थितियों के लिए मौन रह जाते हैं। हम टूट चुके होते हैं, फिर भी दूसरों को संभालते हैं।
यही तो है—जीने के लिए बार-बार जहर पीना।
हर किसी के जीवन में कुछ ऐसे अध्याय होते हैं, जिन्हें वह किसी को पढ़ाना नहीं चाहता। कुछ आँसू ऐसे होते हैं, जिन्हें आँखों तक आने की अनुमति नहीं होती। कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जिन्हें मुस्कान के पीछे छिपाकर रखना पड़ता है।
लोग अक्सर कहते हैं—“तुम तो बहुत मजबूत हो।”
उन्हें क्या पता, मजबूत होने का अर्थ यह नहीं कि दर्द नहीं होता। मजबूत होने का अर्थ है—दर्द होने के बावजूद जीवन को छोड़ना नहीं।
कई बार परिस्थितियाँ हमें भीतर से तोड़ देती हैं, लेकिन जिम्मेदारियाँ हमें बिखरने नहीं देतीं। घर के लिए, बच्चों के लिए, माता-पिता के लिए, अपने सपनों के लिए, अपने कर्तव्य के लिए… इंसान अपने हिस्से के न जाने कितने कड़वे घूंट पीता रहता है।
और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि दुनिया को केवल हमारी मुस्कान दिखाई देती है, उस मुस्कान तक पहुँचने का रास्ता नहीं।
लेकिन शायद जीवन की खूबसूरती भी यहीं है।
हर जहर हमें मारता नहीं। कुछ जहर हमें समझदार बनाते हैं। कुछ हमें धैर्य सिखाते हैं। कुछ हमें लोगों को पहचानना सिखाते हैं। कुछ हमारे भीतर ऐसी खामोशी पैदा कर देते हैं, जिसमें हम स्वयं को सुनना सीख जाते हैं।
इसलिए हर कड़वे अनुभव को केवल अभिशाप मत समझिए। कुछ दर्द हमारे भीतर वह गहराई पैदा करते हैं, जो सुख कभी नहीं दे सकता।
हाँ, जिंदगी कई बार बहुत कठिन होती है।
कई बार लगता है कि अब और नहीं सह पाएँगे।
लेकिन फिर भीतर से कोई आवाज आती है—
“थोड़ा और… यह वक्त भी गुजर जाएगा।”
और सच यही है—वक्त गुजर जाता है। लोग बदल जाते हैं। परिस्थितियाँ बदल जाती हैं। घाव भी धीरे-धीरे भरने लगते हैं।
इसलिए अगर आज जीवन ने आपके हाथ में कोई कड़वा प्याला थमा दिया है, तो उसे अपनी नियति मत समझिए। उसे एक दौर समझिए—जो गुजरने के लिए आया है, ठहरने के लिए नहीं।
क्योंकि जिंदगी का अर्थ केवल सुख पाना नहीं है।
जिंदगी का अर्थ है—दुःख के बीच भी उम्मीद बचाए रखना, टूटने के बाद भी उठना और हजार शिकायतों के बावजूद जीवन से प्रेम करते रहना।
मरने के लिए शायद एक बार जहर काफी हो,
लेकिन जीने के लिए कई बार जहर पीना पड़ता है।
और जो इंसान उन कड़वे घूंटों के बाद भी मुस्कुराना सीख लेता है, वही वास्तव में जिंदगी जीना सीख जाता है।
क्योंकि अंततः जिंदगी उन्हीं की होती है,
जो दर्द से हारते नहीं, बल्कि दर्द को अपनी ताकत बना लेते हैं।

About The Author