

प्राथमिक विद्यालय, श्री रामलीला चौक वार्ड नंबर 06 प्रतीत नगर गांव रायवाला में लोक कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित हो रही पंचम श्री रामलीला महोत्सव में मुख्य 06 मुख्य दृश्य प्रदर्शित किए गए जिसमें-
पहला दृश्य – अत्री एवं शृंगी आश्रम
दूसरा दृश्य – श्रीराम- जटायु भेंट
तीसरा दृश्य – पंचवटी
चौथा दृश्य – सुन्दरी सुपर्णखा, राक्षसी सुपर्णखा
पांचवा दृश्य – खर-दूषण वध
छटा दृश्य – रावण-मारीच संवाद
रामलीला महोत्सव के मुख्य मंच उद्घोषक एवं लोक कल्याण समिति के प्रवक्ता श्री विरेन्द्र नौटियाल (वीरू) ने जानकारी देते हुए बताया की लीला में मंचन के शुरू में दिखाया गया है, की भरत से मिलने के बाद श्री राम, सीता और लक्ष्मण वन में अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं। रास्ते में उन्हें ऋषि अत्रि जी का आश्रम मिलता है वो उनसे मिलने के लिए वहाँ रुक जाते हैं। ऋषि अत्रि जी उनका आदर सत्कार करते हैं। श्री राम सीता जी को गुरु माँ अनुसया से मिलने और उनसे ज्ञान लेने के लिए कहते हैं । माता अनुसूया सीता जी को पत्नी धर्म का ज्ञान देती है और बताती है की उन्हें वन में कैसे श्री राम जी के साथ को निभाना है। अनुसया माता सीता जी को आभूषण और वस्त्र देती हैं जो उन्हें देवांगनाओं ने उन्हें उपहार में दिए थे । वनवास में जाते हुए श्री राम सीता और लक्ष्मण को गिद्ध राज जटायु से मिलता है। जटायु अपने बारे में राम को बताते हैं की वह राजा दशरथ के मित्र हैं और मैं यहीं रहता हूँ। श्री राम को जटायु यहीं वन में कुटिया बनने के लिए कहते हैं और उन्हें आश्वासन देते हैं की मैं आपकी एक प्रहरी की तरह आपकी रक्षा करूँगा। श्री राम उनके आज्ञा से वहीं अपनी कुटिया बना लेते हैं। लक्ष्मण पंचवटी में बहुत ही सुन्दर पर्णकुटी का निर्माण करते हैं। वनवास को बारह वर्ष बीत चुके हैं। सीता शेष दो वर्ष पंचवटी में रहने की इच्छा व्यक्त करती हैं। राम माता कौशल्या को याद कर बहुत अधीर होते हैं। अब वनवास का शेष समय काटना राम और कौशल्या दोनों के लिये कठिन साबित हो रहा है। लेकिन राम के जीवन की सबसे कठिन परीक्षा की घड़ी मुँह बाये खड़ी हो जाती है। एक दिन आकाश मार्ग से जाते समय राक्षसी शूर्पणखा पंचवटी में ध्यानमग्न राम को देखती है। वह उनपर मोहित हो जाती है। शूर्पणखा एक सुन्दर नारी का रूप रखकर राम के रामने आती है और उनका ध्यान भंग कर अपना परिचय देती है। शूर्पणखा कहती है कि वह महर्षि पुलत्स्य के पौत्र व ऋषि विश्रवा के पुत्र रावण की बहन है। वह अपने भाइयों कुम्भकरण, खर व दूषण के बारे में भी बताती है और राम के समक्ष प्रणय निवेदन करती है। राम शूर्पणखा को अपनी पत्नी सीता का परिचय देते हैं। शूर्पणखा सीता को खा जाने अथवा उन्हें दासी बनाकर रखने का विकल्प देकर राम पर विवाह के लिये पुनः जोर देती है। राम शूर्पणखा को उकसाते हुए मना करते हैं। तभी शूर्पणखा की कामुक दृष्टि लक्ष्मण पर पड़ती है। अब वह उनके समक्ष विवाह का प्रस्ताव लेकर जाती है। लक्ष्मण शूर्पणखा से कहते हैं कि वो अपने भाई के दास है, शूर्पणखा को दास और स्वामी के बीच का अन्तर समझना चाहिये। लक्ष्मण शूर्पणखा को फिर से राम के पास जाकर प्रणय प्रस्ताव रखने को कहते हैं। शूर्पणखा इससे अकुला जाती है। उसे लगता है कि सीता के कारण राम उसका प्रणय प्रस्ताव अस्वीकार कर रहे हैं। वो अपने असली राक्षसी रूप में आकर सीता पर हमला करती है। तभी राम का संकेत पाकर लक्ष्मण तलवार से शूर्पणखा की नाक काट देते हैं। शूर्पणखा इस अपमान का बदला लेने की चेतावनी देकर वहाँ से चली जाती है। राम कुछ बुरा घटने को लेकर सशंकित होते हैं। वे लक्ष्मण को सचेत रहने को कहते हैं। राम लक्ष्मण से तिरस्कृत शूर्पणखा अपने भाईयों खर और दूषण के पास जाती है। उन्हें झूठी कथा सुनाकर भड़काती है। खर दूषण राम लक्ष्मण को मारने और सीता को उठा लाने के लिये चौदह दानवों को भेजते हैं। राम लक्ष्मण पहले से सावधान हैं। राम केवल एक बाण से सभी दानवों का सिर धड़ से अलग कर देते हैं। यह समाचार सुनकर खर दूषण पूरी सेना के साथ आक्रमण करते हैं। राम लक्ष्मण को सीता की सुरक्षा हेतु कुटिया में रहने को बोलकर अकेले युद्ध करने जाते हैं। युद्धक्षेत्र में राम का सामना खर दूषण से होता है। वे युद्ध को तत्पर होते हैं तभी उनके मानस में महर्षि अगस्त्य आते हैं और उनसे कहते हैं कि ये दानव कपट युद्ध करने वाले हैं। इनपर विजय पाने के लिये वे ऋषि विश्वामित्र द्वारा प्रदत्त मोहिनी अस्त्र का प्रयोग करें। जिसके बाद खर-दूषण का वध हो जाता है ।
शूर्पणखा रावण के पास जाती है और उस से झूठ बोलती है की वो सीता को रावण के लिए लाना चाहती थी लेकिन राम और लक्ष्मण ने उसका उपहास उड़ाया और जब उसने बताया की वो रावण की बहन है तो उन्होंने उसकी नाक काट कर रावण को भी अपमानित किया है। विभीषण रावण को कहता हिया की शूर्पणखा की बात पर यकीन ना करे पहले मामले की जानकारी ले फिर ही कोई निर्णय ले। शूर्पणखा रावण को अपने अपमान पर बदला लेने की बात पर सोचने के लिए रोने लगती है की कोई भी रावण की बहन का अपमान कर दे तो रावण पहले मंत्रियों से सलाह करेगा और फिर निर्णय लेगा। यह सुन रावण क्रोधित हो जाता है। रावण को उसका मंत्री सलाह देता है की वो क्यों ना राम की पत्नी सीता का अपहरण कर ले जैसे उनसे शूर्पणखा का अपमान किया है उसका यही बदला ठीक होगा। रावण यह बात मान कर अपने मामा मारीच के पास जाता है और उस से कहता हिया की वो उसकी मदद सीता का हरण करने में करे। मारीच श्री राम की शक्ति और असलियत को जानता था वह रावण को समझता है लेकिन रावण उसकी एक नहीं सुनता रावण के दबाव पर मारीच रावण की बात मान लेता है ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री शूरवीर सिंह सजवाण जी पूर्व कैबिनेट मंत्री उत्तराखंड सरकार, श्री संजीव चौहान जी प्रतिनिधि ब्लॉक प्रमुख पौड़ी गढ़वाल प्रदेश सहसंयोजक नमामि गंगे, ग्राम प्रधान हरिपुर कला सविता शर्मा को लोक कल्याण समिति द्वारा रामदरबार की माला, प्रतीक चिन्ह एवं रामदरबार की फोटो देकर सम्मानित किया गया । साथ ही साथ आए हुए अतिथियों सहित सैकड़ों राम भक्तों ने मंचन को देखा और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया ।
शूर्पनखा नासिका छेदन, खर-दूषण, त्रिसरा प्रसंग,साधु मारीच-रावण संवाद प्रसंग कलाकारों के सुन्दर गायन, अभिनय की भूरि-भूरि सराहना करते हुये रामलीला का आनन्द लिया। देश -विदेश के व्यक्तियों ने घर बैठे आन-लाईन लीला का आनन्द लेते हुये संदेशें द्वारा रामलीला मंचन की काफी सराहना की गयी ।
लोक कल्याण समिति के प्रवक्ता विरेन्द्र नौटियाल (वीरु) , मुख्य निर्देशक महेंद्र राणा, अध्यक्ष गंगाधर गौड़ , उपाध्यक्ष बालेन्द्र सिंह नेगी , सचिव नरेश थपलियाल , कोषाध्यक्ष मुकेश तिवाड़ी , सदस्य आशीष सेमवाल, राजेन्द्र प्रसाद रतुड़ी, नवीन चमोली, राम सिंह, आचार्य संजय सेमवाल, राजेश जुगलान, राजेन्द्र कुकरेती , गंगा बहादुर , सुनील तिवाड़ी , अरुण डबराल , त्रिलोक सिंह , रमेश क्षेत्री, अनीता जुगलान, रुचि सती, रेखा थपलियाल , रेखा तिवाड़ी, रोहित, मोहन, ईशांत, सूरज चमोली सहित सैकड़ो रामभक्त उपस्थित रहे ।
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