79वें निरंकारी संत समागम का दूसरा दिन: ‘जागृति’ और एकत्व के संदेश से गूंजा समागम

79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का दूसरा दिन आध्यात्मिक जागृति, प्रेम और एकत्व के संदेश से आलोकित रहा। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि वास्तविक जागरूकता केवल बाहरी सजगता नहीं, बल्कि विचारों, व्यवहार और भावनाओं में भी चेतन रहने का नाम है।देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में सतगुरु माता जी ने प्रेम, विनम्रता, सहनशीलता और सत्य को जीवन में अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सत्संग तभी सार्थक है, जब उसकी शिक्षाओं को व्यवहार में उतारकर आत्मसुधार की दिशा में निरंतर प्रयास किया जाए।इससे पूर्व निरंकारी राजपिता रमित जी ने ब्रह्मज्ञान, प्रेम और समर्पण के महत्व को समझाते हुए सेवा, सुमिरन और सत्संग के जरिए जीवन को बेहतर बनाने का संदेश दिया। इस अवसर पर चिश्ती फाउंडेशन की ओर से सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज को ग्लोबल पीस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।समागम में लगी मुख्य प्रदर्शनी, बाल प्रदर्शनी और संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इनके माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान, बच्चों में संस्कार, रक्तदान, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक कल्याण से जुड़े प्रयासों को प्रदर्शित किया गया।

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