‘घुन्या’ यानि छुपा रुस्तम….डॉ. राकेश चन्द्र रयाल (मनरागी)

गढ़वाली भाषा के कुछ शब्द ऐसे हैं, जिन्हें समझने के लिए शब्दकोश से अधिक जीवन के अनुभवों की जरूरत पड़ती है। ऐसा ही एक अर्थपूर्ण शब्द है ‘घुन्या’।
‘घुन्या’ शब्द की उत्पति ‘घुन’ से हुई है। घुन दिखाई नहीं देता, वह अनाज के भीतर चुपचाप अपना काम करता रहता है। बाहर से दाना ठीक दिखाई देता है, लेकिन भीतर से वह खोखला हो चुका होता है।
गढ़वाली में ‘घुन्या’ उस व्यक्ति को कहा जाता है, जो ऊपर से शांत, सरल और शरीफ दिखाई दे, कम बोले और अपने इरादे आसानी से प्रकट न करे, लेकिन भीतर-ही-भीतर अपना काम करता रहे। उसके किए का पता तब चलता है, जब स्थिति काफी बदल चुकी होती है।
हिंदी में ऐसे व्यक्ति को ‘छुपा रुस्तम’, ‘छिपा खिलाड़ी’, ‘मौन रणनीतिकार’ या ‘पर्दे के पीछे का कलाकार’ कहा जा सकता है। लेकिन ‘घुन्या’ शब्द इन सभी भावों को एक साथ व्यक्त करता है।
घुन्या की सबसे बड़ी ताकत उसकी शांत और निर्दोष छवि होती है। वह खुले तौर पर विवाद नहीं करता, ऊँची आवाज में बात नहीं करता और सबके साथ विनम्र बना रहता है। उसकी बातों में अपनापन दिखाई देता है, लेकिन कई बार उसके पीछे कोई उद्देश्य छिपा होता है।
ऐसे व्यक्ति सीधे किसी विवाद में शामिल नहीं होते। वे केवल लोगों के बीच गलतफहमी पैदा करने वाली बातें रखते हैं और फिर स्वयं अलग खड़े रहते हैं। धीरे-धीरे संबंधों में दूरी बढ़ती है और विवाद गहरा हो जाता है, जबकि उसका कारण स्पष्ट नहीं हो पाता।
घुन्या की चुप्पी सामान्य शांति नहीं होती। उसके पीछे कई बार सोच, योजना और अवसर की प्रतीक्षा होती है। वह परिस्थिति को ध्यान से देखता है और उसी पक्ष का साथ देता है, जहाँ उसे अपना लाभ दिखाई देता है।
फिर भी हर शांत व्यक्ति घुन्या नहीं होता। बहुत से लोग स्वभाव से गंभीर और कम बोलने वाले होते हैं। उनकी चुप्पी में कोई चाल नहीं होती। असली घुन्या वह है, जिसकी चुप्पी के पीछे शांति नहीं, बल्कि गणित हो; जिसकी विनम्रता के पीछे अपनापन नहीं, बल्कि रणनीति हो; और जिसकी मौजूदगी या अनुपस्थिति के बावजूद उसके प्रभाव से विवाद बना रहे।
‘घुन’ अनाज को बाहर से नहीं तोड़ता, बल्कि भीतर से खोखला करता है। इसी तरह कुछ लोग रिश्तों, संस्थाओं और समूहों को सामने से नुकसान पहुँचाए बिना भीतर-ही-भीतर कमजोर करते रहते हैं। जब तक उनकी भूमिका समझ में आती है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।
इसी कारण ‘घुन्या’ शब्द इतना सटीक और प्रभावशाली है। यह केवल किसी व्यक्ति का नाम नहीं बताता, बल्कि उसके स्वभाव, व्यवहार और कार्य करने के तरीके को भी स्पष्ट करता है।
गढ़वाली की खूबसूरती यही है कि उसका एक शब्द पूरा चरित्र और पूरा भाव अपने भीतर समेट लेता है। ‘घुन्या’ ऐसा ही शब्द है शांत दिखाई देने वाला, लेकिन भीतर से सक्रिय व्यक्ति।

हर शांत व्यक्ति भोला नहीं होता और हर मुस्कुराता चेहरा अपना नहीं होता।

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