उत्तराखंड के ऋषिकेश में इन दिनों कथित वसूली के आरोपों को लेकर रंगा बिल्ला की खूब चर्चाएं चल रही हैं। इन चर्चाओं के चलते ऐसा सियासी भूचाल आया की भाजपा ने रातों रात अपने दो नेताओं को निकाल दिया।
कौन है ऋषिकेश के रंगा बिल्ला?
ऋषिकेश में रंगा बिल्ला से जुड़ा मामला सोशल मीडिया और कोतवाली से निकलकर अब सियासी गलियारों तक भी पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्टस की मानें तो ऋषिकेश में ऐआई से एक पोस्टर बनाकर जगह जगह चिपका चिपकाए गए थे। इस पोस्टर में दो तस्वीरें थी जिन्हें रंगा बिल्ला नाम दिया गया था। पोस्टरों में शहर में चल रहे कुछ निर्माण कार्यों में कथित वसूली के आरोप लगाए गए थे। हालांकि वसूली करने वाले लोगों का नाम नाम सीधा सिधा नहीं लिया गया।
रंगा बिल्ला से जुड़े पोस्टर वायरल
रंगा बिल्ला से जुड़े ये पोस्टर देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। कई दिनों तक ऋषिकेश में बस एक ही चर्चा होती रही कि आखिर ये रंगा-बिल्ला हैं कौन? जिसके बाद 9 अगस्त को इसी मामले में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और शिरोमणि अकाली दल के नेता जगजीत सिंह उर्फ जग्गा के नेतृत्व में लोग ऋषिकेश कोतवाली पहुंच गए।
आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं
जहां कोतवाली के बाहर भीड़ नारे लगाती रही प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि लिखित शिकायत देने के बाद भी अब तक आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। आरोप यहीं नहीं रुके, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शीरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष जगजीत सिंह जग्गा जैसे लोग जो रंगा-बिल्ला का विरोध कर रहे हैं। उनपर को खूब मुकदमे दर्ज हो रहे हैं लेकिन रंगा बिल्ला मामले में पुलिस कोई कार्वाई नहीं कर रही।
जगजीत सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग
इसी बीच लोग जगजीत सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग भी करने लगे। साथ ही प्रदर्शनकारीयों का कहना था कि जिन लोगों ने ये मुकदमे दर्ज कराए हैं उनपर ही कार्रवाई होनी चाहिए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने बार-बार समझाने की कोशिश की। लेकिन भीड़ अपनी मांगों पर अड़ी रही।
मीडिया रिपोर्टस की मानें तो ऋषिकेश कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक यशपाल सिंह बिष्ट ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया की पुलिस सभी तथ्यों और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई होगी, चाहे वो कितना भी रसूखदार क्यों न हो।
प्रदर्शनकारियों को दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच का भरोसा
कोतवाल ने ये भी कहा कि पुलिस पीड़ितों के मुकदमे दर्ज करने से पीछे नहीं हट रही। पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को जगजीत सिंह की कथित गतिविधियों के बारे में भी बताया। साथ ही दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया गया।
काफी समझाने-बुझाने के बाद आखिरकार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराया। लेकिन इस पूरे विवाद ने इसके बाद सियासी जामा भी ओढ़ लिया।
बीजेपी ने दो पदाधिकारियों को पदमुक्त किया
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इस पूरे मामले के चर्चा में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने दो पदाधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें पदमुक्त कर दिया। मीडिया रिपोर्टस का कहना है कि युवा मोर्चा के जिला कार्यालय मंत्री अभिनव पाल और वीरभद्र मंडल अध्यक्ष रणजीत सिंह को बीजेपी ने सर्वसम्मति से पदमुक्त कर दिया।
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