आस्था, एकजुटता और नवचेतना का प्रतीक बन रहा बुगाला गांव, श्री नागराजा मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह 7-8 मई को

टिहरी गढ़वाल जनपद की दोगी पट्टी क्षेत्र अंतर्गत स्थित बुगाला गांव इन दिनों धार्मिक उल्लास और सामुदायिक एकता के रंग में रंगा हुआ है। रयाल परिवारों के इस प्रमुख गांव में नव निर्मित श्री नागराजा मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा एवं पूजन समारोह आगामी 7 और 8 मई 2026 को भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन बुगाला देवस्थानम सेवा एवं चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में सम्पन्न होगा, जिसमें क्षेत्रवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गांव की सामूहिक चेतना, सांस्कृतिक जुड़ाव और सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणादायक कहानी भी है। वर्षों पहले गांव के लोगों को जोड़ने के उद्देश्य से बने एक छोटे से व्हाट्सएप्प समूह ने आज एक संगठित ट्रस्ट का रूप ले लिया है, जो निरंतर गांव के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
बुगाला देवस्थानम सेवा एवं चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा अब तक गांव में कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा चुके हैं। इनमें शिव मंदिर निर्माण, पितरों की स्मृति को सहेजने हेतु ‘पितृ कुड़ी’ और ‘पितृालय’ का निर्माण विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। अब इसी श्रृंखला में भगवान नागराजा मंदिर का निर्माण गांव की आस्था और एकजुटता का नया प्रतीक बनकर सामने आया है।
दो दिवसीय धार्मिक आयोजन के अंतर्गत 7 मई को प्रातः 7 बजे मंदिर से भगवान नागराजा की मूर्ति स्नान यात्रा आरंभ होगी। इसके पश्चात गणेश पूजन, मूर्ति स्नान एवं वास, भोग-प्रसाद तथा संध्या आरती जैसे कार्यक्रम संपन्न किए जाएंगे।
8 मई को प्रातः 7 बजे से विधिवत पूजन आरंभ होगा। सुबह 9 बजे जागर स्तुति एवं पारंपरिक डौर-थाली कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके उपरांत मूर्ति स्थापना, हवन, पूर्णाहुति, आरती तथा विशाल भंडारा-प्रसाद का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम स्थल बुगाला नागराजा मंदिर प्रांगण रखा गया है। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस पुण्य अवसर का हिस्सा बनने और भगवान नागराजा देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है।
बुगाला गांव की यह पहल आज यह संदेश दे रही है कि जब गांव के लोग एकजुट होकर अपनी संस्कृति, परंपरा और आस्था को संजोने का संकल्प लेते हैं, तब केवल मंदिर ही नहीं बनते, बल्कि समाज में नई सकारात्मक ऊर्जा और पीढ़ियों को जोड़ने वाली चेतना का भी निर्माण होता है।

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