यूकेडी को नेतृत्व की लड़ाई नहीं, उत्तराखंड की लड़ाई लड़नी होगी

उत्तराखंड क्रांति दल केवल एक राजनीतिक पार्टी नहीं था, वह उस संघर्ष की राजनीतिक अभिव्यक्ति था जिसने उत्तराखंड राज्य के निर्माण का सपना देखा और उसे साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि राज्य बनने के बाद से ही दल को जितना संघर्ष बाहरी राजनीतिक शक्तियों से करना पड़ा, उतना ही संघर्ष कई बार अपने भीतर भी दिखाई दिया। नेतृत्व को लेकर खींचतान, गुटबाजी और आपसी विवादों ने यूकेडी की राजनीतिक ताकत को कमजोर किया है। इतिहास में भी दल के भीतर नेतृत्व विवाद और विभाजन सामने आते रहे हैं।

आज भी जब यूकेडी के सामने उत्तराखंड के मूल सवाल—मूल निवास, भू-कानून, रोजगार, पलायन, जल-जंगल-जमीन और पहाड़ की अस्मिता—को लेकर बड़ी राजनीतिक भूमिका निभाने का अवसर है, तब उसे अपने भीतर की लड़ाइयों से ऊपर उठने की जरूरत है। हाल के समय में भी संगठन के भीतर मतभेद और विवाद सार्वजनिक चर्चा में रहे हैं।

ऐसे समय में शांति प्रसाद भट्ट जैसे लोगों का महत्व समझना चाहिए।

मैं लगभग तीन दशकों से शांति भट्ट को देख रहा हूँ। टीवी चैनलों से लेकर सार्वजनिक मंचों तक उन्हें लगातार उत्तराखंड और यूकेडी के पक्ष में अपनी बात मजबूती से रखते देखा है। आज भी पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट उन्हें मुख्य प्रवक्ता के रूप में दर्ज करती है।

सबसे बड़ी बात यह है कि इतने लंबे समय में मैंने उनमें पद और नेतृत्व की महत्वाकांक्षा को कभी हावी होते नहीं देखा। वे लगातार संगठन और उत्तराखंड के सवालों की आवाज बने रहे।

यही वजह है कि मेरे लिए शांति भट्ट केवल यूकेडी के एक प्रवक्ता नहीं, बल्कि उस राजनीतिक पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं जिसने उत्तराखंड को केवल सत्ता का प्रदेश नहीं, बल्कि अस्मिता और अधिकार का प्रदेश माना।

यूकेडी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को अब यह तय करना होगा कि लड़ाई कौन नेता बनेगा इसकी होनी है या उत्तराखंड कैसे बचेगा इसकी।

क्योंकि जनता को गुट नहीं चाहिए, एक मजबूत क्षेत्रीय आवाज चाहिए।

नेतृत्व आते-जाते रहेंगे, लेकिन उत्तराखंड हमेशा रहेगा।

इसलिए व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर यदि यूकेडी अपने पुराने संघर्ष, विचार और उत्तराखंड की जनता के सवालों को केंद्र में रखे, तो वह फिर से अपनी प्रासंगिकता हासिल कर सकती है।

यूकेडी को एक-दूसरे से नहीं, उन ताकतों से लड़ना है जो उत्तराखंड के हितों को कमजोर करती हैं।

जय उत्तराखंड।

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