सबरी के जूठे बेर खाकर भगवान राम ने दिया सामाजिक समानता का संदेश

पंचम श्रीरामलीला महोत्सव के आठवें दिन सीता हरण, जटायु उद्धार और राम-शबरी मिलन का भावपूर्ण मंचन ।

रायवाला। प्राथमिक विद्यालय, वार्ड नंबर-06, प्रतीतनगर, रायवाला में लोक कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित पंचम श्रीरामलीला महोत्सव के आठवें दिन सीता हरण, जटायु उद्धार, राम वियोग और राम-शबरी मिलन सहित प्रमुख प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। इन प्रसंगों को देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। विशेष रूप से भगवान राम द्वारा शबरी के प्रेमपूर्वक अर्पित बेर स्वीकार करने के प्रसंग ने समाज में समानता, प्रेम और समरसता का संदेश दिया।

लोक कल्याण समिति के प्रवक्ता एवं रामलीला महोत्सव के मुख्य मंच उद्घोषक श्री विरेन्द्र नौटियाल (वीरू) ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार की लीला में सर्वप्रथम लक्ष्मण-सीता संवाद का मंचन किया गया। कथा के अनुसार, मारीच ने मायावी स्वर्ण मृग का रूप धारण कर पंचवटी में भगवान राम की कुटिया के आसपास विचरण करना शुरू कर दिया। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता ने भगवान राम से उसे पकड़कर लाने का आग्रह किया। भगवान राम मृग के पीछे चले गए। कुछ समय बाद मारीच ने भगवान राम की आवाज में सहायता के लिए पुकार लगाई, जिसे सुनकर माता सीता चिंतित हो गईं और उन्होंने लक्ष्मण को भगवान राम की सहायता के लिए जाने को कहा।

लक्ष्मण ने माता सीता को समझाने का प्रयास किया कि यह किसी मायावी छल का हिस्सा हो सकता है, लेकिन उनके आग्रह पर लक्ष्मण कुटिया के बाहर लक्ष्मण रेखा खींचकर भगवान राम की खोज में निकल गए। इसी बीच रावण साधु का वेश धारण कर भिक्षा मांगने पहुंचा। माता सीता लक्ष्मण रेखा पार कर उसे भिक्षा देने आईं, तभी रावण ने उनका हरण कर लिया और उन्हें पुष्पक विमान से लंका ले गया।

जब भगवान राम और लक्ष्मण कुटिया लौटे तो माता सीता को वहां न पाकर अत्यंत व्याकुल हो उठे। सीता की खोज के दौरान रास्ते में उनकी भेंट गिद्धराज जटायु से हुई। जटायु ने उन्हें रावण द्वारा माता सीता के हरण की पूरी घटना बताई। रावण से युद्ध करते हुए जटायु गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनकी वीरता और समर्पण से भावुक भगवान राम ने जटायु को मोक्ष प्रदान किया। इस प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

इसके पश्चात भगवान राम और लक्ष्मण की शबरी से भेंट का मंचन हुआ। माता शबरी ने भगवान राम के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा और प्रेम प्रकट करते हुए उन्हें मीठे बेर अर्पित किए। भगवान राम ने शबरी के प्रेमभाव को स्वीकार कर समाज को यह संदेश दिया कि किसी भी व्यक्ति को छोटा या तुच्छ नहीं समझना चाहिए। भक्ति में जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। माता शबरी ने भगवान राम को आगे किष्किंधा पर्वत पर निवास कर रहे महाराज सुग्रीव और उनकी वानर सेना के बारे में बताया तथा सीता की खोज में उनसे सहायता मिलने की संभावना जताई।

संत-महात्माओं एवं विशिष्ट अतिथियों की रही गरिमामयी उपस्थिति

श्रीरामलीला महोत्सव में अनेक संत-महात्माओं एवं विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता की। इनमें प्रमुख रूप से:

1. परम आदरणीय श्री महंत मनोज प्रपन्नाचार्य जी महाराज, महंत, शत्रुघ्न घाट, मुनि की रेती, टिहरी गढ़वाल एवं मुनि की रेती नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष।

2. परम आदरणीय श्री महंत रवि प्रपन्नाचार्य जी महाराज, तुलसी मानस मंदिर, ऋषिकेश एवं नगर निगम ऋषिकेश के पूर्व ब्रांड एंबेसडर।

3. आदरणीय श्री प्रदीप शर्मा जी, उत्तराधिकारी, जयराम आश्रम अन्न क्षेत्र, ऋषिकेश।

4. परम पूज्य श्री महंत करुणा शरण जी महाराज, महंत, हनुमान मंदिर, मायाकुंड, ऋषिकेश।

5. आदरणीय श्री अभिषेक शर्मा जी, अध्यक्ष, धर्मशाला आश्रम प्रबंध समिति, ऋषिकेश।

इस अवसर पर एम्स ऋषिकेश के प्रोफेसर डॉ. प्रखर शर्मा, हरिद्वार मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. काश्मी शर्मा, कथा वाचक आचार्य अतुल कृष्ण महाराज, बांके बिहारी कीर्तन मंडली तथा श्री कृष्ण लीला कमेटी को लोक कल्याण समिति की ओर से सम्मानित किया गया।

उपस्थित संतों एवं अतिथियों ने श्रीरामलीला महोत्सव के सफल आयोजन की सराहना करते हुए लोक कल्याण समिति के प्रयासों की प्रशंसा की।

समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की रही सक्रिय सहभागिता

इस अवसर पर लोक कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री गंगाधर गौड़, उपाध्यक्ष श्री बालेन्द्र सिंह नेगी, सचिव श्री नरेश थपलियाल, कोषाध्यक्ष श्री मुकेश तिवाड़ी, प्रवक्ता एवं मुख्य मंच उद्घोषक श्री वीरेंद्र नौटियाल ‘वीरू’, मुख्य एवं वरिष्ठ निर्देशक श्री महेंद्र सिंह राणा, सदस्य श्री नवीन चमोली, श्रीमती अंजु बड़ोला एवं श्री राजेंद्र प्रसाद तिवाड़ी सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

संगीत पक्ष में तबलावादक श्री कमल रामानुज, हारमोनियम वादक श्री पूरन चंद एवं ऑक्टोपस वादक श्री कुणाल शर्मा ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम को संगीतमय बनाया। महोत्सव में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान श्रीराम की लीलाओं का आनंद लिया।

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